Shivendra Mohan Singh

कुछ नई, कुछ पुरानी और कुछ दिल की बातें ………

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अच्छे दिन आने वाले हैं

Posted On: 17 May, 2014 Others में

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गहन तिमिर की घटाएं
प्रतिकूल व्यवस्थाएं
निगलने तो आतुर लोलुपताएं
कंटकीर्ण रास्ते
चहुंओर घेरे विषधर भयंकर
​आस्तीनों में बैठे नाग जहरीले

लहराया परचम फिर भी सुहाना
आशाओं का दीपक हुआ फिर प्रज्ज्वलित
सुनहरे दिनों का आकांक्षित हुआ मन
उगने को है फिर से वैभव का सूरज
सुखी मन सुखी जन है गर्वित ये भारत



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mircea के द्वारा
October 17, 2016

Your articles are for when it abyloutels, positively, needs to be understood overnight.

deepak pande के द्वारा
May 20, 2014

अद्भुत अनुपम

    Shivendra Mohan Singh के द्वारा
    May 20, 2014

    आदरणीय दीपक पाण्डेय जी, बहुत बहुत धन्यवाद। — सादर, शिवेंद्र मोहन सिंह

sadguruji के द्वारा
May 19, 2014

संक्षिप्त परन्तु बहुत सारगर्भित रचना.बहुत बहुत बधाई.ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं-लहराया परचम फिर भी सुहाना आशाओं का दीपक हुआ फिर प्रज्ज्वलित सुनहरे दिनों का आकांक्षित हुआ मन उगने को है फिर से वैभव का सूरज सुखी मन सुखी जन है गर्वित ये भारत

    Shivendra Mohan Singh के द्वारा
    May 20, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. ​सादर,

jlsingh के द्वारा
May 17, 2014

माली ऐसा चाहिए, किसलय को दे प्यार, खर पतवारहिं छाँट कर, कलियन देहि निखार! आशाओं का दीपक हुआ फिर प्रज्ज्वलित सुनहरे दिनों का आकांक्षित हुआ मन उगने को है फिर से वैभव का सूरज सुखी मन सुखी जन है गर्वित ये भारत आपको को बधाई ! आदरणीय शिवेंद्र मोहन जी!

    Shivendra Mohan Singh के द्वारा
    May 19, 2014

    माली ऐसा चाहिए, किसलय को दे प्यार, खर पतवारहिं छाँट कर, कलियन देहि निखार! आदरणीय सिंह साहब, बहुत बहुत धन्यवाद। — सादर, शिवेंद्र मोहन सिंह


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